आत्मविश्वास, रोज़ थोड़ा-थोड़ा।
दिनचर्या, नींद, फ़ोकस और सार्वजनिक असफलता के बाद ख़ुद से होने वाली बात।
आत्मविश्वास याद नहीं आता, दोबारा बनाया जाता है।